देवेन्द्र मिश्रा DNA : पिछली नवरात्रि से शुरू हुआ कोरोना महामारी का प्रकोप अगले महीने आ रही नवरात्रि तक खत्म होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में इस बार नवरात्रि में गरबा की धुन पर थिरकने वाले युवाओं के अरमान टूट गए हैं। हर साल धमतरी शहर में भव्य रासगरबा का आयोजन होता था। एक महीने पहले से ही आयोजक तैयारियों में जुट जाते थे। जगह-जगह गरबा प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू हो जाता था, नौसिखियों और पारंगत युवक-युवतियों में भी नए-नए स्टेप्स सीखने की होड़ मचती थी। एक से बढ़कर एक गरबा परिधान पहनने को युवतियां लालायित रहतीं थीं। मगर, इस साल यह इच्छा भी अधूरी रह जाएगी।
लाखों के पारंपरिक परिधान का होता था व्यापार
धमतरी के कुछ व्यापारी राजधानी रायपुर, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई से हर साल नई-नई डिजाइनों के पारंपरिक गरबा परिधान मंगवाते थे। प्रदेश के अन्य शहरों में भी करोड़ों रुपये का व्यापार होता था। इन्हें पहनने के शौकीन युवा पूरे नौ दिनों तक अलग-अलग डिजाइनों के कपड़ों पर हजारों रुपये खर्च करते थे। व्यापारियों ने इस साल पारंपरिक परिधानों का ऑर्डर ही नहीं दिया है।
जनहित में गरबा न करना उचित
शहर के आम नागरिक बताते हैं कि इस साल कोरोना के प्रकोप को देखते हुए गरबा का आयोजन करना उचित नही है । मास्क पहनना, शारीरिक दूरी बनाए रखना अहम जिम्मेदारी है। बीमारी न फैले इसलिए जनहित में आयोजन न करने में ही समझदारी है।

