Dussehra : शादरीय नवरात्रि 7 अक्टूबर से आरंभ हो गई है। वह 14 अक्टूबर को इसका समापन होगा। नवमी तिथि के अगले दिन अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस वर्ष 15 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का त्योहार है। इस दिन रावण दहन के अलावा शस्त्र पूजन का विधान है।
इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करा था। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। वहीं इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। इस दिन शस्त्र पूजा की परंपरा भी है। दशहरा पर लोग वाहनों की भी पूजा करते हैं। वह नया कार्य आरंभ करने के लिए विजयादशमी का दिन बहुत शुभ माना जाता है
पूजा विधि-
दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वस्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। फिर सभी शस्त्रों को पूजा के लिए एक जगह रख दें। अब सभी पर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। फिर हल्दी या कुमकुम से तिलकर लगाकर पुष्प अर्पित करें। फूलों के साथ शमी के पत्ते भी चढ़ाएं।
दशहरा मुहूर्त-
विजय मुहूर्त: 15 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 38 मिनट से 02 बजकर 24 मिनट तक।
- अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि शुरू: 14 अक्टूबर शाम 06 बजकर 52 मिनट से।
- अश्विन मास शुक्ल पक्ष तिथि समाप्त: 15 अक्टूबर शाम 06 बजकर 02 मिनट पर।
