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DHAMTARI :: ज्ञान अमृत इंग्लिश स्कूल में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम से मनाई गई, राधाकृष्ण, देवकी, वसुदेव, नंद और यशोदा के वेश भूषा में दिखे बच्चे..

 

ज्ञान अमृत इंग्लिश स्कूल में आज कृष्ण जन्माष्टमी  उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं राधाकृष्ण,  देवकी, वसुदेव, नंद और यशोदा का वेश भूषा धारण करके विद्यालय में पहुंचे थे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गौतम चोपड़ा (समाजसेवी) एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्ञान अमृत उच्चतर माध्यमिक शाला के प्राचार्य विनोद पांडेय तथा मंच पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक   पुष्पा जाधव एवं  भुनेश्वरी देवांगन उपस्थिति उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री कृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात रंग-बिरंगे परिधान से सुसज्जित बच्चे जो राधा कृष्ण के रूप में उपस्थित थे उनकी आरती अतिथियों द्वारा की गई। इस अवसर पर मटका सजाओ, कृष्ण झूला सजाओ,  नृत्य एवं राधा कृष्ण सजाओ प्रतियोगिता आयोजन भी किया गया एवं कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी बच्चों को मुख्य अतिथि गौतम चोपड़ा द्वारा पुरस्कृत किया। गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि चोपड़ा ने छात्र-छात्राओं को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा  कि कृष्ण जन्माष्टमी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है इस दिन श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली अवतारों में से एक है। यह अवतार का उद्देश्य धर्म की स्थापना और बुराई को समाप्त करना था। उन्होंने पूरी दुनिया को प्रेम का संदेश दिया। विद्यालय के प्राचार्य विनोद पांडेय ने इस अवसर पर कहा.कि कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न मनाने का त्यौहार है। भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं जो तीन लोको के तीन गुणों सतगुण,  रजगुण तथा तमोगुण मे से सतगुण विभाग के प्रभारी हैं। भगवान का अवतार होने की वजह से श्री कृष्ण जी मे जन्म से ही सिद्धियां मौजूद थी। उनके माता-पिता वसुदेव और देवकी जी के विवाह के समय मामा कंस जब अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने जा रहा था,  तभी आकाशवाणी हुई थी जिसमें बताया गया था की देवकी का आठवां पुत्र कंस को मारेगा अर्थात यह होना पहले से ही निश्चित था। अतः वसुदेव और देवकी को जेल में रखने के बावजूद कंस कृष्ण जी को नहीं मार पाया।  श्री विष्णु के दसवें अवतारों में से सर्वाधिक अनुपम और अद्वितीय श्रीकृष्णावतार को माना जाता है। यह त्योहार विश्व में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।