धमतरी :: एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत आइएचसीआई (इंडियन हाइपरटेंशन कंट्रोल इनिशिएटिव) योजना का शुभारंभ आज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.डी.के.तुर्रे द्वारा जिला चिकित्सालय के एनसीडी क्लीनिक में मरीजों को बी.पी.पासपोर्ट कार्ड देकर किया गया। इस मौके पर डॉ.तुर्रे ने मरीजों को बताया कि बीपी की दवाइयां नियमित खानी है तथा डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करना है। साथ ही बीपी की जांच जरूर करानी है। उन्होंने बताया कि यदि उच्च रक्तचाप को नियंत्रित नहीं किया गया, तो हाई बीपी की वजह से हार्ट अटैक अथवा स्ट्रोक के कारण पैरालिसिस हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रति चार व्यक्ति में से एक को हाइपरटेंशन (हाई बीपी) है। इनमे सें मात्र आधे लोगों को पता होता है कि उन्हें हाई बीपी है। उच्च रक्तचाप हमारे शरीर में मौजूद रक्त नसों/धमनियों में लगातार संचरण करता है। रक्त प्रवाह की वजह से नसों पर पड़ने वाला दबाव ब्लड प्रेशर या रक्तचाप कहलाता है। इसका घटना-बढ़ना हृदय की गति और नसों/धमनियों अवरोधों पर निर्भर करता है।
डॉ.तुर्रे ने यह भी बताया कि उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर कहा जाता है। दिल-दिमाग में रक्त के बहाव को अनियंत्रित करने वाली यह बीमारी कई बार जानलेवा साबित होती है। उन्होंने बताया कि धमतरी के वयस्कों की 17 फीसदी आबादी रक्तचाप की बीमारी से पीड़ित है। उच्च रक्तचाप पीड़ितों के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। डब्ल्यू एच ओ एवं आईसीएमआर के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से मरे लोगों में एक तिहाई हाइपरटेंशन से पीड़ित थे। उच्च रक्तचाप के मरीजों में संक्रमण का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है।
बताया गया है कि आईएचसीआई योजना जिले के सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर शुरूआत की जानी है। डॉ.तुर्रे ने बताया कि 2025 तक उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों पर 25 फीसदी तक कमी करना इस योजना का उद्देश्य है। साथ ही हाई बीपी के मरीजों को 25 फीसदी तक कंट्रोल करने का लक्ष्य है। इसके लिए उच्च रक्तचाप के मरीजों को बीपी पासपोर्ट कार्ड दिया जाएगा, जिससे फॉलोअप के दौरान उनका बीपी कंट्रोल में है अथवा नहीं पता किया जा सकेगा। उद्घाटन अवसर पर राज्य कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सुमी जैन, डब्ल्यूएचओ के राज्य कार्डियो वैस्कुलर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.उर्विन शाह, सिविल सर्जन डॉ.एस.एम.एम.मूर्ति सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।
डॉ.तुर्रे ने यह भी बताया कि उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर कहा जाता है। दिल-दिमाग में रक्त के बहाव को अनियंत्रित करने वाली यह बीमारी कई बार जानलेवा साबित होती है। उन्होंने बताया कि धमतरी के वयस्कों की 17 फीसदी आबादी रक्तचाप की बीमारी से पीड़ित है। उच्च रक्तचाप पीड़ितों के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। डब्ल्यू एच ओ एवं आईसीएमआर के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से मरे लोगों में एक तिहाई हाइपरटेंशन से पीड़ित थे। उच्च रक्तचाप के मरीजों में संक्रमण का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है।
बताया गया है कि आईएचसीआई योजना जिले के सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर शुरूआत की जानी है। डॉ.तुर्रे ने बताया कि 2025 तक उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों पर 25 फीसदी तक कमी करना इस योजना का उद्देश्य है। साथ ही हाई बीपी के मरीजों को 25 फीसदी तक कंट्रोल करने का लक्ष्य है। इसके लिए उच्च रक्तचाप के मरीजों को बीपी पासपोर्ट कार्ड दिया जाएगा, जिससे फॉलोअप के दौरान उनका बीपी कंट्रोल में है अथवा नहीं पता किया जा सकेगा। उद्घाटन अवसर पर राज्य कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सुमी जैन, डब्ल्यूएचओ के राज्य कार्डियो वैस्कुलर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.उर्विन शाह, सिविल सर्जन डॉ.एस.एम.एम.मूर्ति सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।
